गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबीन में डाले:लांबा

नगरपरिषद कार्यालय में सफाई को लेकर सक्षम युवाओं को किया जागरुक, कचरे व सफाई के बारे में दी जानकारी समय की ताकत/ संजीव बंसल कुरुक्षेत्र, स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 को लेकर नगरपरिषद थानेसर के कार्यालय में एक मिटिंग का आयोजन किया गया। इसमें जहां स्वच्छता के प्रति कैसे लोगों को जागरुक किया जाए व गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग व उनका प्रयोग करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। नगरपरिषद की सफाई शाखा से सफाई निरीक्षक संजय कुमार लांबा ने सक्षम युवाओं को जानकारी देते हुए बताया कि गीले कचरे के लिए हरे डस्टबीन, सूखे कचरे के लिए नीले डस्टबीन का प्रयोग किया जाना चाहिए। गीले कचरे की बात करें तो उसमें घरों के किचन से निकलने वाला कूड़ा-कर्कट व घरों में बनाए पार्क-गार्डन इत्यादि से निकलने वाली फूल-पत्तियां होती है। यदि इनके लिए घरों में अलग डस्टबीन होगा तो इस कचरे से खाद बनाई जा सकती है। जिसका प्रयोग फसलों के लिए किया जाता है। वहीं सूखे कचरे में प्लास्टिक, पेपर, लोहा, बोर्ड व अन्य वस्तुएं आती हैं। यदि इनके लिए नीले रंग का डस्टबीन घरों में होगा तो इन्हें रिसाईकिलिंग करने में परेशानी नहीं होगी, क्योंकि यदि ये डस्ट सूखे कचरे के साथ चला गया तो वह खाद में मिलकर फसलों के माध्यम से किसी न किसी रुप में हमारे शरीर में प्रवेश कर जाएगा जोकि आगे जाकर केंसर व अन्य बीमारियों का कारण बनता है। स्वच्छ भारत मिशन के जिला सहयोगी रजत कुमार ने खतरनाक कचरा के बारे में बताया कि घरों में अकसर ब्लैड, सिरिंज, कांच व सीएलएफ इत्यादि भी मिलते हैं और डोमेस्टिक बायोमेडिकल वेस्ट जिसमें मास्क, गल्वज व कोविड-19 से जुड़ा सामान होता है उसे भी उचित तरीके से नष्ट करना चाहिए। क्योंकि कई बार डंप साईट पर पशु इत्यादि पहुंच जाते हैं और वे इन्हें खा जाते हैं इससे ये ब्लैड इत्यादि अंदर जाकर उन्हें बहुत नुकसान पहुंचाते हैं जिससे कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। इसलिए सफाई और गीला व सूखा कूड़ा के लिए अलग-अलग डस्टबीन जरुर लगाएं। इस मौके पर स्वच्छ भारत मिशन के सहायक आकाश, सुपरवाइजर सोनिया शर्मा, मंजीत सिंह सैनी, मलकीत, सतबीर आदि मौजूद थे।