कैथल, 8 दिसंबर (संजीव कौशिक /समय की ताकत ) सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि कृषि सुधारों के विरोध से विपक्ष का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है। उन्होंने कहा कि कृषि सुधारों का विरोध करने वाले विपक्षी दल जो इसका विरोध कर रहे हैं वे केवल सरकार का विरोध करने के नाम पर ही किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ही नई-नई योजनाएं बना रहे हैं और तीन नये कृषि कानून भी इसलिए बनाये गये हैं कि किसानों की आमदनी बढ़े। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल झूठ की राजनीति करते हैं और उन्होंने आज तक कोई ऐसे कार्य नहीं किए, जोकि किसान के लिए फायदेमंद हो।सांसद नायब सैनी ने जारी अपने बयान में कहा कि कृषि सुधारों की बात करने वाली पार्टियां किस प्रकार से अब किसानों का गुमराह कर अपनी-अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने जो आपत्तियां नये कृषि कानूनो को लेकर उठाई हैं उसके लिए सरकार से बातचीत चल रही है और सरकार की ओर से किसानों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कृषि सुधारों की बात करने वाले दलों का इसके खिलाफ खड़े हो जाना ऐसी पार्टियों के शर्मनाक चेहरे और दोहरे रवैये को उजागर करता है। उन्होने कहा कि विपक्षी दल अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाने के लिए ही किसानों को गुमराह व भड़काने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों का विरोध करना कृषि क्षेत्र के हित में नहीं है।सांसद ने कहा कि पिछली सरकारों ने अपने घोषणा पत्रों में एपीएमसी सुधार, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 सुधार एवं करार संबधित कानून बनाने का वायदा किया था, आज जब मोदी सरकार ने उन्हीं विषयों पर कानून बनाये हैं तो विपक्षी दल किसानों को भड़का कर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कोई संबध नहीं है। एमएसपी था, है और भविष्य में भी रहेगा, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। कृषि मंडियों के अस्तित्व पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा। कृषि मंडियों का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा। पूर्व की भांति किसान, कृषि मंडियों मे अपने कृषि उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पर बेच सकेगा। नये कृषि कानूनों से कृषि क्षेत्र के विकास को नई दिशाएं मिलेगी। कृषि क्षेत्र आर्थिक रूप से सुदृढ होगा और इससे देश के किसान सशक्त होंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग किसानों की रक्षा का ढिंढोरा पीट रहे हैं वे किसानों को अनेक बंधनों में जकड़ कर रखना चाहते हैं। किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिये होते हैं उनसे किसानों को बचाने के लिए यह कानून रक्षा कवच बनकर आए हैं। एक प्रकार से ये कृषि कानून किसानों को आजादी देने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि सुधार से जुडे तीन नये कानूनों का विरोध कर राजनैतिक दल पैर जमाने की कौशिश में है।
