चंडीगढ़ /पंचकूला, 5 नवंबर (वासु के मेहता राजधानी ब्यूरो प्रमुख)दशहरे के बाद अब दिवाली के त्योहार पर भी कोरोना का संकट नजर आने लगा है। इस साल पटाखे बेचने और चलाने को लेकर अभी तक प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी है। हालांकि पटाखों की बिक्री के लिए मिलने वाले लाइसेंस के लिए प्रशासन ने ड्रॉ निकाल दिए हैं।
ड्रॉ के जरिए 96 लोगों के नाम आए हैं, जिन्हें पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस दिया जाना है। लेकिन ये लाइसेंस तभी मिलेगा, जब प्रशासन पटाखों की बिक्री को हरी झंडी देगा। चंडीगढ़ क्रैकर्स डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट देविंदर गुप्ता ने कहा कि जितने बड़े व्यापारी हैं, वे पटाखों के ऑर्डर दे चुके हैं और पैसे भी दे चुके हैं।
कारोबारी बोले-पहले ही लॉकडाउन ने कमर तोड़ रखी है, जबकि बड़े स्तर पर पराली जलाना प्रदूषण का मुख्य कारण...
चंडीगढ़ क्रैकर्स डीलर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी चिराग अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन व राज्य सरकारों को हर साल दिवाली के दिनों में ही प्रदूषण की चिंता क्यों होती है। पंजाब में बड़े स्तर पर पराली जलाई जाती है, जोकि प्रदूषण की बड़ी वजह है।इसे राज्य सरकार काबू नहीं कर पा रही है। अग्रवाल ने कहा कि राम मंदिर बनने के बाद देशभर में खुशी का माहौल है, लेकिन जिस तरह दशहरे का त्योहार नहीं मनाया गया और अब दिवाली भी जोर-शोर से नहीं होगी तो लोग भी मायूस होंगे।
4 लाख का नया ऑर्डर दे दिया
योगेश कुमार जैकी ने बताया कि उनके पास भी पिछले साल का डेढ़-दो लाख का सामान पड़ा है। अब इस साल के लिए भी 4 लाख रुपए के सामान का ऑर्डर दे चुके हैं। अगर परमिशन नहीं तो उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हो जाएगा।
दिवाली पर आस लगाकर बैठे हैं हम---- पटाखों के व्यापारी दीपक महाजन के पास पिछले साल का ही एक लाख का माल बचा पड़ा है। महाजन ने कहा कि हम दिवाली पर आस लगाकर बैठे हैं, ताकि लॉकडाउन में जो हमें आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हो सके। लेकिन प्रशासन ने हमारी चिंता बढ़ा दी है। हम तो एक साल पहले ही पटाखों के लिए होल सेलर्स को 50 हजार रुपए एडवांस जमा करवा चुके हैं।
