जिला ब्यूरो चीफ= आशीष कुमार गुप्ता
सादुल्लानगर/बलरामपुर =सादुल्लाहनगर बलरामपुर : दीपावली पर घरों को रोशन करने की तैयारी कुम्हारों ने शुरू कर दी है दीए बनाने से लेकर पूजन के लिए बिभिन्न बर्तनों को तैयार करने में उनका अधिकांश समय चाक पर गुजर रहा है । हाल के कुछ वर्षों में मिट्टी के दीयों के प्रति रूझान कम होने से भी वे विचलित नहीं है ।
सरकार ने प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा रखा है । ऐसे में मिट्टी के दीये और अन्य बर्तनों के दिन लौट रहे हैं । इससे प्रर्यावरण संरक्षण के साथ कुम्हारों के धंधे में तेजी आई है कुम्हार शिव कुमार का कहना है कि वर्षों पूर्व मिट्टी के बर्तन की मांग काफी थी । इससे घर परिवार का भरण-पोषण होता था , लेकिन हाल में मिट्टी का वर्तन के प्रति रूझान कम हुआ है । लोग प्लास्टिक से बनी वस्तुओं को प्राथमिकता देने लगे। अब प्लास्टिक होने से एक बार फिर हमारे पुस्तैनी पेशे में गति मिली है दीपावली का त्योहार नजदीक होने से लोगों ने अभी से मिट्टी के बर्तनों की मांग शुरू कर दी है कलश और दीया की मांग सबसे ज्यादा है । कुछ अनाज आदि रखने के लिए भी मिट्टी वर्तन ले जा रहे हैं । वर्तन में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी महंगे दर पर मिलने से इसमें कुछ रुकावट आ रही है लेकिन उम्मीद है कि दीपावली पर बम्फर बिक्री से हम मुनाफा कमा सकेंगे ।
क्या कहते हैं युवा
आरजू काज़मी,श्यामलाल,उदयभान मौर्या , रमेश गुप्ता , अरविंद उपाध्याय ,राजेश कुमार ,रवि तिवारी , मनोज चौबे ,राधेश्याम गुप्ता ,पवन कुमार ,अजय यादव , रमेश चौहान , राम निरंजन , लालता प्रसाद ,श्याम बिहारी , सुरेश जायसवाल ,आलोक मिश्रा आदि लोग कहते हैं कि कुम्हारों से बने मिट्टी के दीए को ही इस साल जलाएं गे इसके लिए लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं ।
क्या बोले पुरोहित :
शास्त्रों में मिट्टी के दीए जलाने के लिए बताया गया है। दीपावली के पर्व पर दीए जलाने की परम्परा है इसमें धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है घर में सुख समृद्धि आती है । मिट्टी के वर्तनो से पूजा अर्चना करने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं ।
पंडित दुर्गा प्रसाद तिवारी