कुवि पूरे देश में आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में जाना जाएः सतीश कुमार

विश्वविद्यालय के 5 लाख युवाओं के माध्यम से स्थापित हो कौशल विकास का स्वरूपः सतीश कुमार

के.एस.ए. मॉडल के अनुरूप मजबूत होगा कुविः प्रो. सोमनाथ




संजीव बंसल/समय की ताकत
कुरुक्षेत्र,  भारत के प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ एवं स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक माननीय सतीश कुमार ने कहा है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय  देश में आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल तैयार करे जो पूरे भारत में जाना जाए, क्योंकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 7 जिलों से 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुडे़ हुए हैं विश्वविद्यालय के शिक्षकों को अपने छात्रों के माध्यम से उनके अंदर के कौशल को विकसित कर मंच प्रदान करना चाहिए ताकि पूरे भारत के लिए वो रोल मॉडल बन सकें।

        वे शुक्रवार को कुरुक्षेत्र  विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग व स्वदेश स्वावलम्बन न्यास के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव अभियान सप्ताह समारोह के अन्तर्गत स्वदेशी से आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सद्भाव विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल खरीद का विषय नहीं बल्कि इसमें राष्ट्रीयता की भावना निहित है।
        उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड़-19) महामारी के संक्रमण से लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए लगाए गये बेहद आवश्यक सम्पूर्ण लॉकडाउन ने विश्व के अधिकांश देशों की वित्तीय स्थिति खराब कर दी थी। कोरोना वायरस ने आज दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बहुत ही बुरी तरह से अस्त-व्यस्त करके ध्वस्त कर दिया है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी उसके प्रभाव से अछूती नहीं है, आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था को भी बहुत ही ज्यादा मुश्किल हालात के दौर से गुजरना पड़ रहा है।  हमारे देश के दिग्गज नीति-निर्माता लगातार अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए धरातल पर तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय को भारत के लिए एक बहुत ही अच्छे व्यापारिक मौके के रूप में देख रहे हैं। 12 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में देश की आम जनता से कहा था कि संकट के इस दौर में “लोकल“ ने ही हमें बचाया है, स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों ने ही हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है, हमें इसे ही अपने आत्मनिर्भर बनने का मंत्र बनाना चाहिये, अपने संबोधन में उन्होंने पहली बार “लोकल पर वोकल“ का एक नया नारा भी देश की सम्मानित जनता को दिया था। स्वदेशी व आत्मनिर्भर भारत के भाव से यह लड़ाई हमने 3 माह में जीती।
        मुख्य वक्ता सतीश कुमार ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 5200 वर्ष पूर्व इसी धरा पर अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इसी धरा से ज्ञान की जोत जली थी। उन्होंने कहा कि आप सभी लोग भाग्यशाली हैं कि आप भी इस धरा पर रह रहे हैं। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान दिया था, अर्जुन के अंदर वीरता थी उन्होंने केवल अर्जुन के अंदर पड़ा अज्ञानता का परदा दूर किया था। इसी तरह शिक्षकों को विद्यार्थियों के अंदर की उर्जा को बाहर लाना है। शिक्षा का उद्देश्य अंदर के ज्ञान को बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि नैतिक दायित्व से उपर राष्ट्रीय दायित्व होता है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ज्ञान का खजाना है। युवाओं में हम कौशल विकास करके आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक मिसाल पेश कर सकते हैं।
        उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों में उर्जा है उसको केवल दिशा व स्वरूप देने की जरूरत है। शिक्षक आत्मनिर्भर भारत बनाने में अहम् रोल निभा सकते हैं व आत्मनिर्भर भारत का डिजाईन  प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे पूर्व मुख्य वक्ता सतीश कुमार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सोमनाथ सचदेवा सहित सभी अतिथिगणों ने सरस्वती देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत् उद्घाटन किया।
        कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वदेश स्वावलम्बन न्यास देश में भाईचारे को बढ़ाने व राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए कार्य करता है। स्वदेशी का अर्थ मेड बाय इंडिया होता है अर्थात् जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा अधिकार इंडियन के पास हों। आत्मनिर्भरता का अर्थ होता जहां पर हम कुछ कर सकते हैं वहां पर वो चीज कही बाहर से न मंगवाएं। स्वदेशी वस्तुओं के प्रोत्साहन के लिए धरातल पर अमलीजामा पहनाने की पहल खुद से करनी होगी, उनको खुद के इस्तेमाल में सबसे पहले स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना होगा।
        प्रो. सोमनाथ ने कहा कि देश के शीर्षस्थ राजनेताओं, नौकरशाहों व सरकारी कार्यालयों के द्वारा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देकर देशवासियों के सामने मिसाल पेश करनी होगी, तब ही अन्य सरकारी स्टाफ व देश की आम जनता उनका अनुसरण करेगी और तभी स्वदेशी वस्तुओं के हित में धरातल पर कुछ ठोस बदलाव भी संभव है।
        सभी देशवासियों को स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की जरूरत है, आपदाकाल के बाद देश को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की यह पहल भविष्य में हम सभी भारतवासियों के लिए बहुत ही सकारात्मक अच्छे परिणाम ला सकती है। जब तक हम स्वयं अपने उद्योग धंधो का समर्थन नहीं करेंगे तब तक सुधार नहीं हो सकता।
        प्रो. सोमनाथ ने कहा कि नॉलेज, स्किल तथा एटिट्यूड (के, एस एंड ए मॉडल) को मजबूत करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अभी कुलपतियों की बैठक कर उन्हें भी स्वदेशी को अपने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में शामिल करने के लिए कहा था। अनुसंधान व विकास, सभी की पदोन्नति समय पर हो यह हमारा उद्देश्य होना चाहिए। ज्ञान एक बहुत बड़ी चीज है और विज्ञान उसका अंशमात्र है। युवाओं  में स्किल विकसित हों इसके लिए ऐसे पाठ्यक्रम हो जिसमें स्किल के विषय हों और विद्यार्थियों में कौशल विकास हों। इस मौके पर कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने मुख्यातिथि सतीश कुमार को विश्वविद्यालय की ओर से श्रीमद्भगवद्गीता एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
        कार्यक्रम के अंत में डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजूला चौधरी ने सभी का धन्यवाद किया व कहा कि विश्वविद्यालय इन विचारों को लेकर आगे बढ़ेगा। विद्यार्थियों में  कौशल विकास हो व वो तकनीकी रूप से प्रशिक्षित हों इसके लिए विश्वविद्यालय में कई कोर्स चलाए जा रहे हैं।
        मंच का संचालन युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने किया। डॉ. विनेद कुमार ने मुख्य वक्ता सतीश कुमार का परिचय दिया। इस मौके पर केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अनिल वशिष्ठ, आयुष विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. कृष्ण जाटियान, सभी डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्रो. भगवान सिंह चौधरी, कुटा प्रधान डॉ. परमेश कुमार, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उप-निदेशक डॉ. गुरचरण सिंह, लोक सम्पर्क विभाग के उप-निदेशक डॉ. दीपक राय बब्बर व कर्मचारी मौजूद रहे।