संजीव बंसल/समय की ताकत
कुरुक्षेत्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केन्द्र व डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन द्वारा आयोजित प्रथम ऑनलाइन गुरु दक्षता फैकेल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के तीसरे दिन डॉ सतीश यादव ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए विभिन्न एजेंसियों के बारे में बताया जहां से शोध करने के लिए, शोध को बढ़ावा देने के लिए और इससे संबंधित गतिविधियां करवाने के लिए फंड प्राप्त किया जा सकता है। भारत में सभी शिक्षा आयोग शोध कार्य पर बल देने के लिए कहते हैं । सभी मंत्रालय शोध कार्य के लिए फंड देते हैं । प्रतिभागियों को शोध प्रोजेक्ट अपने अपने कार्य क्षेत्र में आवेदन करने के लिए प्रेरित किया । राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के बारे में बताते हुए कहा इसका उद्देश्य राज्यों में उच्चतर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न प्रयास करना है। राज्यों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता, सभी की पहुँच और उत्कृष्टता बढ़ाने के लिये आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
दूसरे सत्र में डॉ. गोविंद सिंह ने शिक्षार्थी की मानसिकता विकास में शिक्षक की भूमिका विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मार्गदर्शन बच्चों के जीवन जीने की शैली को बहुत हद तक प्रभावित करता है। शिक्षकों को ’मेरा कार्य ही मेरा पुरस्कार हैं’ समझ कर कार्य करना चाहिए। हमें अपने पढ़ाने के तरीकों को उत्तम करते हुए, विद्यार्थियों को सेल्फ लर्निंग व प्रेरणादायक किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
दोपहर बाद के सत्र में डॉ. तरुणा चौधरी ने शैक्षिक संचार विषय व्याख्यान देते हुए शिक्षक में रचनात्मक दृष्टिकोण और सतत सकारात्मक शैली पर जोर दिया। शिक्षको में अपने छात्रों के प्रति प्यार, सहानुभूति की क्षमता, निष्पक्ष होना, आवश्यक व्यावसायिक ज्ञान, कौशल और अपने विषय के क्षेत्र में योग्यताएं का होना बहुत आवश्यक है। शिक्षक को शिक्षार्थियों के लिए सुविधा देने के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना चाहिए। वक्ताओं का स्वागत व धन्यवाद, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजवीर व सह संयोजक डॉ. आनंद ने किया।