महिला शक्ति 50 फीसदी आरक्षण से दिखाएंगी पंचायतों में अपना दमखम : राज्यमंत्री कमलेश ढांडा



रवि गोयल/ समय की ताकत

कैथल,महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ऐतिहासिक काम कर रही है। जहां एक तरफ ई गवर्नेस से गुड गर्वनेंस की ओर बढ़ते हुए व्यवस्था में परिवर्तन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देना इस बात का परिचायक है कि महिलाएं भी पंचायती संस्थाओं में अपना योगदान दे सकें और अपने गांव के विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकें। महिला शक्ति अपने अनुभवों से गांव के समुचित विकास करने में समान रूप से भागीदारी कर सकेंगी।उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव को सम-विषम (ऑड ईवन) के आधार पर कोड दिए जाएंगे। भविष्य में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं यानी जिला परिषद, ब्लॉक पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के चुनावों में यह नियम लागू हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित होकर न केवल अपने गांव की आवाज को बुलंद करेंगी, बल्कि विकास के भी नए आयाम स्थापित करेंगी। उन्होंने कहा कि हर दस साल में पांच साल हरियाणा के हर गांव में एक महिला सरपंच होगी। यह नियम आरक्षित पदों पर भी लागू होगा। इसके साथ ही, ग्राम पंचायत के पंचों के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 50 फीसदी पंचों के पद महिलाओं के लिए रहेंगे। ये व्यवस्था ग्राम पंचायतों के बाद जिला परिषद और ब्लॉक पंचायत समिति में भी लागू होगी। जिला परिषद और ब्लॉक समिति के सदस्यों और चेयरमैन के पदों के लिए भी ऑड-ईवन का फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों और अन्य आरक्षित सीटों पर भी महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये फैसले महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे। पंचायतों में महिलाओं की 50 प्रतिशत की भागेदारी सुनिश्चित होने से निश्चित रूप से ना केवल ग्राम पंचायतों की तस्वीर बदलेगी,बल्कि महिलाएं भी ग्राम विकास में अपना अहम योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को बधाई देती हूं, इस तरह राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह विधेयक प्रदेश की महिलाओं में नए आत्मविश्वास का संचार करेगा और उन्हें सशक्त करेगा। इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत के चुनाव में पहली बार बीसीए वर्ग को आठ प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। इस नियम के लागू होने से बीसीए वर्ग के लोगों को पंचायती राज संस्थाओं में और अधिक प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। सरकार सबका साथ-सबका विकासके सिद्धांत को जमीनी रूप दे रही है।