डॉ शंकर लाल हमारे बीच से हमेशा के लिए चले गए


पानीपत (जय भगवान अत्री) हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के जिला पानीपत कार्यकारिणी के सदस्य और ज्ञान-विज्ञान आंदोलन के संस्थापकों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले डॉ शंकर लाल आज हमारे बीच से हमेशा के लिए चले गए। पिछले दिनों कोरोना से तो वे जीतकर आ गए थे परंतु मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के चलते उन्हें हृदयाघात हो गया। इसराना की अनाज मंडी से लेकर श्मशानभूमि तक सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। वे अपने इलाके के उच्च कोटि के चिकित्सक और प्रगतिशील समाज सुधारक थे। सामाजिक कार्यों की उनकी यात्रा 1983 में जनवादी सांस्कृतिक मंच से आरंभ हुई। 1987 में हरियाणा विज्ञान मंच के संस्थापक सदस्य रहते हुए शंकरलाल ने पानीपत की चौथी लड़ाई के नाम से प्रसिद्ध साक्षरता अभियान में अग्रणी भूमिका निभाई। वे एक कर्मठ चिकित्सक होने के साथ-साथ उच्च कोटि के सामाजिक सरोकारों वाले मार्गदर्शक भी थे। मरीजों से कम से कम पैसा लेकर अच्छे से अच्छा इलाज देने की प्रतिबद्धता उनमें जीवन पर्यंत बनी रही। अनेक मरीजों का तो वे मुफ्त में इलाज कर देते थे। उनकी अंतिम विदाई के अवसर पर हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के राज्य सचिव प्रमोद गौरी एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य भीम सिंह तथा मदनपाल छोक्कर शामिल रहे। प्रांत-भर की अनेक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित होने के लिए पहुंचे। उनके सामाजिक रिश्ते राष्ट्रव्यापी थे और उन्होंने वैज्ञानिक जागरूकता के लिए अनेक प्रांतों की लंबी-लंबी यात्राएं भी की थीं। अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी उनका संपर्क बना रहता था। हरियाणा के समूचे ज्ञान-विज्ञान आंदोलन को उनके चले जाने से भारी क्षति पहुंची है और समस्त ज्ञान-विज्ञान आंदोलन उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता है। उनके बेटे डॉ नवमीत नव भी सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं और पिता की ही भांति सामाजिक सरोकार रखते हैं। डॉ शंकर लाल एक अध्ययनशील, तर्कशील और प्रगतिशील व्यक्तित्व के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे ।