राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष व दलितों के मसीहा स्वर्गीय श्री बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन किया


  • आजादी की लड़ाई में बाबू जगजीवन राम जी ने सभी आंदोलनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
  • सफल राजनीतिज्ञ, ईमानदार व  कर्मठ नेता की छवि इनके संपूर्ण जीवन काल में देखने को मिली।
  • बाबू जग जीवन राम स्वतंत्रता की लहर में पैदा हुए प्रखर देशभक्त थे।
  • बांग्लादेश द्वारा बाबू जगजीवन राम को युद्धवीर नायक की उपाधि से नवाजा गया।

कुरुक्षेत्र (संजीव बंसलमहामंत्री हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी, समन्वयक  व पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी कुरुक्षेत्र के पवन गर्ग  ने बाबू जगजीवन राम  की पुण्यतिथि पर  उन्हें शत-शत नमन किया । पवन गर्ग ने  बताया कि  ऐसी महान शख्सियत के स्वामी भारत देश में  कम ही  जन्म लेते हैं।  देश की आजादी के लिए उन्होंने महात्मा गांधी  के  साथ मिलकर सभी आंदोलनों में भाग लिया और  जेल भी गए  । आजादी के पश्चात  पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर इन्होंने  देश के विकास के लिए  बहुत योगदान दिए  । बाबू जगजीवन राम भारत के उप प्रधानमंत्री  और रक्षा मंत्री भी रहे हैं  । इनकी कार्यकुशलता को देखते हुए वह आईसीसी के अध्यक्ष पद पर भी  नियुक्त हुए ।
            बाबू जगजीवन राम ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद और सिद्धहस्त लेखक मन्मथनाथ गुप्त जैसे विख्यात स्वतंत्रता विचारको के साथ भी कार्य किया।
            बाबूजी ने दिसंबर 1885 में बनी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपनी माँ के समान बताया है व इसकी सेवा में सदैव आगे रहे | बाबूजी वर्ष 1937-77 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे | बाबू जगजीवन राम महात्मा गांधीजी के प्रिय तो थे ही साथ ही पंडित जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गाँधी, पंडित लाल बहादुर शास्त्री के सबसे अहम सलाहकारों में से भी एक थे | बाबू जगजीवन राम भारत के प्रमुख निर्माताओं में से एक है | देश के करोड़ों हरिजन, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक लोग उन्हें अपना मुक्तिदाता मानते हैं। 
            जगजीवन राम ने कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी (सी.एफ़.डी.) नामक एक नयी पार्टी की रचना की | वर्ष 1977 के आम चुनावों में बाबूजी की विजय हुई व उन्हें रक्षा मंत्रालय का दायित्व दिया गया | 1979 में उन्हें भारत का उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। बाबू जगजीवन राम जी को सरकार में जो भी पद प्राप्त हुए हैं  चाहें उप प्रधान मंत्री, रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री पद हो उन्होंने अपने पद की गरिमा को बनाए रखा और देश हित के लिए कार्य किए।
            बाबू जग जीवन राम स्वतंत्रता की लहर में पैदा हुए प्रखर देशभक्त थे। वे बड़े विद्वान तथा प्रबुद्ध विचारक थे। समाजिक विषमता की पीड़ा को उन्होंने अपने जीवन काल से ही झेला था। इस कारण वे जो भी काम करते थे, उसका चिंतन राष्ट्र की स्वतंत्रता के साथ साथ युगों से चली आ रही सामाजिक विषमताओं को कैसे दूर किया जाए। दोनों पर एक साथ रहा। वे विदेशी सत्ता को देश का प्रथम शत्रु मानते थे।उनका कहना था कि एक होकर विदेशी सत्ता को भारत से दूर भगायें।
            बांग्लादेश ने स्व. बाबू जगजीवन राम को 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए मुक्ति संग्राम के युद्धवीर नायक की उपाधि देकर उनका सम्मान किया। बाबू जगजीवन राम 1971 के युद्ध के समय भारत के रक्षा मंत्री थे। बांग्लादेश की ओर से दिए गए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि बाबूजी ने अपने प्रयासों से बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों को प्रशिक्षण, अस्त्र-शस्त्र और रसद उपलब्ध करवाकर युद्ध की ठोस और समन्वित नीति बनाई थी।
            बाबू जगजीवन राम जी की पुत्री श्रीमति मीरा कुमार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से हैं। वह लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष (स्पीकर) के रूप में 3 जून 2009 को निर्विरोध चुनी गयी।
            गर्ग ने सभी नगरवासियों को श्रावण मास के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ देश परदेश पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और कोरोनावायरस से देशवासियों की रक्षा करें।
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