प्रदेश ब्यूरो चीफ आशीष गुप्ता
वाराणसी 14 जुलाई। काशी के सभी मंदिरों के दरवाजे भक्तो के लिये बंद है परन्तु श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पट किस लिए इतने नाजुक संक्रमण काल मे खोल कर सरकार और जिला प्रशासन क्या संदेश देने का प्रयास कर रही है वाराणसी शहर मे बाबा भोलेनाथ के छोटे बड़े सभी मंदिरों को खोलने की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा जनहित में अनुमति नहीं दी गयी जहाँ के छोटे छोटे पुजारी इन मंदिरों के कारोबारी फूल, माला प्रसाद बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाते थे उनके सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए है और एक मात्र काशी विश्वनाथ मंदिर भक्तो के लिये क्यों खोला जाता है यह अपने आप मे आश्चर्य है जब प्रगति यात्रा के संवाददाता के विश्वसनीय सूत्र बताते है कि भक्तो के दर्शन और उनकी सुविधाओ पर खर्च होने वाले बैर्केटिंग जैसी अन्य व्यवस्था मे होने वाले बंदर बाट के लिये कुछ प्रभावशाली लोगो के दबाव मे मंदिर खोला गया है जबकि सूत्र बताते है कि मंदिर मे कार्यरत कई कर्मचारियो के कोरोना टेस्ट अभी तक नहीं किये गये है जो जनमानस की सुरक्षा दृष्टि से उचित नहीं है यह कार्य भक्तो के लिये मंदिर खोलने के पूर्व करना आवश्यक था ! आज इस खेल को हम अपने पाठकों के आगे खोलते है जैसा कि सर्वविदित है कि काशी भोले की नगरी है और यहाँ हर वर्ष सावन के महीने में बाबा को जल चढाने के लिए दूर दूर से भक्त आते है इस भीड़ को सुचारू रूप से निर्विघ्न बाबा के दर्शन हो इस लिए यहाँ पर बाँस बल्लियों के जरिए एक अस्थायी रास्ता बनाया जाता है जिसे शुक्रवार को लगाया जाता है और मंगलवार को खोल दिया जाता है परन्तु इस बार भक्तो की संख्या कोरोना काल मे सीमित कर दी गयी है परन्तु यह व्यवस्था चालू है यहाँ दाल मे कुछ काला नही पूरी की पूरी दाल ही काली है नये व्यस्थापक को शायद आते ही घोटालेबाजो ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है और पुराने वालो की बली भी चढ चुकी है।
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