कांग्रेस की भ्रष्ट नीतियों का खामियाजा भुगत रहीं है प्रदेश की जनता : सांसद भाटिया


घरौंडा (प्रवीण कौशिक) सांसद संजय भाटिया ने कहा कि कांग्रेस की भ्रष्ट नीतियों का खामियाजा आज प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस ने अपने शासन काल में ऐसे कार्य किए जिनको दोबारा शुरू करवाने में काफी प्रयास करने पड़ रहे है। उन्होंने कहा कि एनएच-44 का काम करीब डेढ़ साल से रूका हुआ था। अब उस कार्य को तेज गति से शुरू करवाया गया है। कांग्रेस की नीतियों के कारण ही लोगों को बेवजह पानीपत का टोल भुगतना पड़ रहा है। इसके साथ ही पैट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर हल्ला मचा रहे विपक्षियों को भी सांसद संजय भाटिया ने आड़े हाथों लिया है। संजय भाटिया ने कहा कि डीजल और पैट्रोल की कीमतों को लेकर कांग्रेस मगरमच्छी आंसू न बहाए। विपक्षी प्रदर्शन करने से पहले उन राज्यों में डीजल-पैट्रोल के दाम कम करके दिखाए जहां पर उनकी सरकारें है।
            करनाल सांसद संजय भाटिया शनिवार को घरौंडा नई अनाज मंडी स्थित मार्किट कमेटी कार्यालय में विधायक हरविंद्र कल्याण के साथ लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। सांसद व विधायक के सामने थाने, तहसील, जमीन, बीपीएल कार्ड व घरेलू कलह से जुड़ी समस्याएं सामने आई। डिपो होल्डर एसोसिएशन ने कमीशन की समस्या को लेकर भी सांसद को मांग पत्र सौंपा। इन समस्याओं में से ज्यादातर समस्याओं को निदान मौके पर ही कर दिया गया तथा अन्य समस्याओं के समाधान को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए। सांसद ने कहा कि जो समस्याएं टेबल पर हल होने वाली होती है उनको टेबल पर ही हल कर दिया जाता है। जो राज्य स्तर पर हल होने वाली होती है उनको राज्य स्तर और जो केंद्र के लेवल पर हल होती है उनको केंद्रीय स्तर पर बात करके हल किया जाता है। कुछ में सफलता मिलती है तो कुछ में नहीं। सांसद ने कहा कि नेशनल हाइवे का काम करीब डेढ़ साल से किसी कंपनी के विवादों के कारण रूका हुआ था। जिसको लेकर उन्होंने केंद्रीय स्तर पर बातचीत की और कई मीटिंगें भी की। नतीजन आज उसका काम शुरू हो चुका है। लेकिन पानीपत टोल को हटवाने में उनको सफलता नहीं मिल पाई, जिसका कारण कांग्रेस सरकार की भ्रष्ट नीतियां है और इन्हीं नीतियों के कारण आज भी लोगों को बिना वजह पानीपत का टोल देना पड़ रहा है।
  • नौकरियां बिका करती थी और ट्रांसफरों का धंधा था
सांसद भाटिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पहले नौकरियां बिका करती थी और ट्रांसफर या बदलियों का उद्योग धंधा था, जिसके पैसे लगा करते थे। जो व्यक्ति 10 या 20 लाख रुपए की रिश्वत देकर नौकरी लगा हो उससे ईमानदारी की उम्मीद करना बड़ा मुश्किल हो जाता है, लेकिन प्रदेश मुख्यमंत्री ने इस सिस्टम को बदलने के लिए करारी चोट की है। सीएम ने आलोचनाओं की परवाह न करते हुए सिस्टम को दुरूस्त करने का प्रयास किया है और उनके प्रयासों का नतीजा है कि आज योग्यता अनुसार युवाओं को नौकरियां मिली है और ऐसा हरियाणा में कभी नहीं हुआ।
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