करनाल (प्रवीण कौशिक) कोरोना महामारी के बीच सेनिटाइजर की डिमांड को पूरा करने वाले आयुर्वेदिक लघु उद्योग अब सरकार की पॉलिसी के कारण परेशान है। जीएसटी के नाम पर आयुर्वेदिक लघु उद्योग संचालकों पर लाखों रुपए की रिक्वरी निकाल दी गई। विभाग के अधिकारियों द्वारा इन कोरोना योद्धा आयुर्वेदिक लघु उद्योग संचालकों को जीएसटी चोरी के नोटिस दिए जाने लगे। ऐसा नहीं कि सब ठीक है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जीएसटी के जिस कोड का हवाला देकर जीएसटी चोरी की बात कही जा रही है, यह कोरोरा योद्धा आयुर्वेदिक लघु उद्योग संचालक उसे अपने ऊपर लागू होने से इंकार करते हैं। हरियाणा आयुर्वेदिक ड्रग मनोफैक्चर एसोसिएशन के प्रधान अनूप भरद्वाज ने बतया कि उनके लाइसेंस आयुर्वेद में रजिस्टर हैं और आयुर्वेद में बनने वाले सामान को मेडिसल कहा जाता है। वह सालों से जीएसटी के कोर्ड 3004 में टैक्स देते आए हैं। कभी कोई आपत्ति नहीं हुई, लेकिन अब सेनिटाइजर को 3808 कोड में बताकर उनसे 18 प्रतिशत टैक्स मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब वह जीएसटी के कोड 3808 में आते नहीं तो उनपर 18 प्रतिशत टैक्स कैसे मांगा जा सकता है। वही अनूप भरद्वाज ने कहा कि सेनिटाइजर को सरकार ने एसेंसियल कम्यूनिटी में शामिल कर दिया था और जीएसटी के अनुसार उसपर केवल 5 प्रतिशत टैक्स लगना चाहिए था, लेकिन फिर भी व्यापारियों ने 12 प्रतिशत टैक्स जमा करवा रखा है। यदि सरकार ने इस भ्रम को खत्म नहीं किया तो वह कोर्ट जाएंगे और जरूरत पड़ी तो वह फिर जीएसटी के 5 प्रतिशत टैक्स वाले बिंदू पर भी अपनी बात कोर्ट में रखेंगे। आज की इस मीटिंग में पृथ्वी सिंगला,अशोक छाबड़ा, राजेंदर चौहान वाईस प्रेजिडेंट, वैभव कक्कर महासचिव, शशि राज जॉइंट सक्रेटरी एवं पूरी हरियाणा की एग्जीक्यूटिव बॉडी मौजूद रही।
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