एमएससी जूलोजी व एमएससी फोरेंसिक साईस में छात्रों के लिए भविष्य की संभावनाएं अधिक, दाखिला लेने की अंतिम तिथि 7 अगस्त


कुरुक्षेत्र, 8 जुलाई (संजीव बंसल) कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का जूलॉजी विभाग सबसे पुराने और अग्रणी विभाग में से एक है। विभाग डीएसटी एफआईएसटी व यूजीसी सेप द्वारा प्रायोजित है। जूलोजी विभाग की स्थापना 1967 में हुई थी और अब तक सफलतापूर्वक जूलॉजी के 53 बैच पूरे हो चुके हैं।
            विभागाध्यक्षा डॉ. अनिता भटनागर ने बताया कि जूलोजी साइंस के हरेक फील्ड की अपनी कॅरिअर संभावनाएं हैं। जूलॉजी भी एक ऐसा विषय है, जो बेहतरीन कॅरिअर के अवसर उपलब्ध करवाता है, साथ ही प्रकृति से जुड़ने व उसके संरक्षण में अहम भूमिका निभाने का मौका देता है। जंतुओं के अध्ययन से जुड़े इस विषय में पढ़ाई व रिसर्च के लिए अच्छा स्कोप है।
            डॉ. अनिता भटनागर ने बताया कि जूलॉजी एक विस्तृत विषय है, जो प्रकृति की गोद में पलने वाले जीव जगत के सभी पहलुओं की पड़ताल करता है। यह जीव-जंतुओं के उद्भव और विकास की प्रक्रिया, उनकी संरचना, व्यवहार, क्रिया-कलापों और मानव के लाभ के लिए उनके विभिन्न उपयोगों का अध्ययन करता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुवि का जूलोजी विभाग दो एमएससी के पाठ्यक्रम चला रहा हैः जूलॉजी में एमएससी और एमएससी फॉरेंसिक साइंसेज। इसके अलावा पीएचडी में अब तक विभाग से 125 से अधिक विद्वानों ने शोध उपाधि प्राप्त की है और 25 शोधार्थी वर्तमान में पीएचडी कर रहे हैं। विभाग के शिक्षकों के भारत के प्रतिष्ठित और विदेश में ख्याति प्राप्त अनुसंधान संस्थानों के साथ संपर्क हैं। विभाग के बहुत से शिक्षकों ने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और यूके की विभिन्न एडवांस प्रयोगशालाओं का दौरा किया हैं। संकाय के कई शिक्षकों ने शोध के क्षेत्र में सम्मान प्राप्त किया है।
            विभाग के छात्रों का प्लेसमेंट 90 प्रतिशत से अधिक है। जूलोजी विभाग के कई छात्र विभिन्न विभागों में उच्च पदों पर स्थान हासिल कर रहे हैं। विभाग के पूर्व छात्र कुलपति, निदेशक, जेडएसआई, एमआरआई, आईएफएस, विभिन्न विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, देश और विदेश के प्रमुख शोध संस्थानों में भी पद प्राप्त कर चुके हैं। विभाग के संकाय सदस्यों और शोध छात्रों ने 1500 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। विभाग विभिन्न गतिविधियों जैसे सेमिनार, कार्यशालाओं और महत्वपूर्ण दिनों के उत्सव जैसे वाइल्ड लाइफ वीक, पर्यावरण दिवस और पृथ्वी दिवस को बड़े उत्साह के साथ मनाने के लिए जाना जाता है। हर साल लगभग 20-25 छात्र जूलॉजी और 10-15 छात्र फोरेंसिक साइंस में नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं। वर्ष 2017 के दौरान यह संख्या 32 छात्रों की थी।
            जूलोजी विभाग में एमएससी जूलोजी के लिए 60 सीटें और फोरेंसिक साईंस के लिए 30 सीटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। हर साल एमएससी  जूलॉजी में प्रवेश प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ योग्यता परीक्षा के आधार पर होता था, लेकिन इस साल कोविड 19 महामारी के कारण दाखिला पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। जूलोजी में एमएससी व एमएससी फोरेंसिक साईंस में दाखिला लेने के लिए आवेदन भरने के लिए 7 अगस्त, 2020 अंतिम तिथि है।
  • जूलोजी में रोजगार एवं शोध की अपार संभावनाएंः डॉ. दीपक राय
जूलोजी विभाग के शिक्षक एवं जूलोजिकल एसोसिएशन के प्रेजीडेंट डॉ. दीपक राय ने बताया कि जूलोजी कोर्स के बाद रोजगार और शोध के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण में बदलाव और मानव हस्तक्षेप के चलते पूरी दुनिया में जीव प्रजातियां तेजी से विलुप्त होती जा रही हैं जिन्हें बचाने के लिए वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फेडरेशन जैसे वैश्विक संगठनों के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारें भी जूलॉजी विशेषज्ञों की मदद लेती हैं। प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटना या पशुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट होने की स्थिति में एनिमल रीहैबिलिटेटर्स की सेवाएं ली जाती हैं। इनका काम जानवरों की देखभाल, बीमार जंतुओं का इलाज और ठीक होने पर उन्हें दोबारा प्राकृतिक परिवेश में छोड़ना होता है।
            उन्होंने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी या पैरासाइट बायोलॉजी जैसी शाखाओं के छात्रों के लिए मेडिकल फॉरेंसिक विभाग, टेस्टिंग लैब और मेडिकल रिसर्च में विकल्पों की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा मनुष्य और पशुओं के लिए दवा निर्माण करने वाली कंपनियों के साथ जुड़कर भी अपने कॅरिअर को ऊंचाइयां दे सकते हैं।
            अकादमिक क्षेत्र में जूलॉजी में ग्रेजुएशन के बाद बीएड के साथ स्कूल और कोचिंग संस्थानों में पढ़ा सकते हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढाने के लिए एमएससी के साथ नेट पास व पीएचडी करना होगा। रिसर्च में जूलॉजी में शोध की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। देश और दुनिया की तमाम श्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज और अनुसंधान संस्थान जूलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च को महत्व दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े वैश्विक संगठनों में भी जूलॉजी के रिसर्चर्स की मांग है। साथ ही कॉस्मेटिक्स, फार्मेसी और एनिमल प्रॉडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों में रिसर्च फेलो के तौर पर अच्छा वेतन हासिल कर सकते हैं।
            भारत में एनिमल हसबैंड्री से जुड़े सभी क्षेत्रों में रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं। इनमें मछलीपालन, पोल्ट्री, रेशम उत्पादन और कृषि पशुओं के प्रजनन व रख-रखाव से जुड़े काम शामिल हैं।
            जीव-जंतुओं से लगाव रखने वाले जूलॉजी छात्रों के लिए जू कीपिंग एक उम्दा विकल्प है। इनका काम प्राणी संग्रहालय (जू) और एक्वेरियम का रख-रखाव और जानवरों की सही तरीके से देखभाल करना है।विद्यार्थी वाइल्डलाइफ एजुकेटर/गाइड भी बन सकते हैं जो वनों में आने वाले पर्यटकों को जानवरों के विषय में जानकारी देने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कोर्स करने के बाद विद्यार्थी एनिमल बिहेवियरिस्ट बन सकते हैं जिनका काम जानवरों के व्यवहार का अध्ययन करना होता है। ये लोग जानवरों के साथ काम करने वाले लोगों को भी प्रशिक्षण देते हैं जिससे वे जानवरों के साथ अच्छे से घुलमिल सकें और उन्हें समझ सकें।
            एजुटेनमेंट लोगों को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए मीडिया का प्रयोग करने की इच्छा रखते हैं तो एजुटेनमेंट या एजुकेशनल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आपके लिए श्रेष्ठ विकल्प है जहां विद्यार्थी डिसक्वरी और नेशनल ज्योग्राफिक जैसे चैनलों के लिए डॉक्यूमेंट्री प्रॉडक्शन, कंटेंट रिसर्च, स्क्रिप्ट राइटिंग, फिल्म मेकिंग, एक्सपर्ट सपोर्ट जैसे काम कर सकते हैं।
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