दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुये मेजर संदीप को दी सलामी


पंचकूला (वासु के मेहता) मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान दुश्मन की बिछाई बारूदी सुरंग फटने पर बहादुरी से वीरगति को प्राप्त हुए भारत माता के महान सपूत मेजर संदीप सागर का नाम इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यह बात सीनियर सिटीजन कौंसिल के अध्यक्ष आरपी मल्होत्रा ने मेजर संदीप सागर के शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कही। सेक्टर 7/8/17/18 के चौंक पर शहीद  मेजर संदीप सागर के स्मारक पर वीरवार को शहीदी दिवस मनाया गया।
         जिसमें सीनियर सिटीजन कौंसिल के अध्यक्ष आरपी मल्होत्रा, वित्त सचिव एनके शर्मा, महासचिव एमसी सेठी, सेक्टर 8 की पंचकूला वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव एचसी गेरा, एसआर बहल, वरिष्ठ उपप्रधान राजेंद्र गोयल, एम एल नागपाल, कर्नल टंडन, सचिव राज सिंह दहिया, वित्त सचिव केके अरोड़ा, श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमएस यादव, जिला सैनिक बोर्ड के सचिव एवं आर्मी सर्विस लीग के मुखिया ब्रिगेडियर किरण कृष्ण, जैक लाइट इंफैक्टरी के कर्नल ओम सिंह, हाउस ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर 10 के चेयरमैन भारत हितैषी सहित अन्य ने शहीद मेजर संदीप सागर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
           इस अवसर पर मेजर संदीप सागर के पिता प्रोफेसर हरबंस लाल एवं माता रक्षा देवी ने बड़े भावुक होकर बताया कि किस प्रकार शहादत से 10-12 दिन पहले संदीप सागर से उनकी बातचीत होना बंद हो गई थी। माता रक्षा ने बताया कि शहादत के बाद उन्हें बेटे संदीप का एक खत मिला, जिसमें संदीप ने लिखा था कि वह अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था, जो उसने करके दिखाया। पिता प्रोफेसर हरबंस लाल ने बड़े गर्व से बताया कि संदीप की ग्रेजुएशन समाप्त होने के बाद उन्होंने संदीप को पुलिस में ट्राई करने को कहा था, तो संदीप ने मनाकर कहा कि मैं पुलिस में नहीं, सेना में भर्ती होकर देश का नाम रोशन करना चाहता हूं। संदीप का चयन सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ। 
            शहीद मेजर संदीप सागर के शहीदी दिवस पर सीनियर सिटीजन कौंसिल द्वारा देश भक्ति संगीत का ऑनलाइन कार्यक्रम भी किया गया, जिसमें भारी संख्या में सदस्यों ने ऑडियो वीडियो डाली और कौसिंल द्वारा यह निर्णय लिया गया कि हर वर्ष मेजर संदीप सागर की याद में ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
            मेयर संदीप सागर की पहली पोस्टिंग जून 1995 में यूपी में हुई। इसके बाद उनकी बटालियन कश्मीर में गई। उन दिनों जेएंडके में ऑपरेशन विजय चल रहा था। बेटा राजौरी सेक्टर में तैनात था, संदीप 25 जून 1999 को शहीद हुआ था। 1999 के जून महीने में लाइन ऑफ कंट्रोल के समीप राजौरी जिला के कलसियां एरिया में आतंकवादियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन चल रहा था। सेना के विजय ऑपरेशन में मेजर संदीप सागर भी शामिल थे। 25 जून को मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान दुश्मन की बिछाई बारूदी सुरंग फटने पर वे शहीद हुए थे।