कुरूक्षेत्र (संजीव बंसल) जिला पुलिस कुरूक्षेत्र द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के सम्बंध में नशा मुक्ति सप्ताह के रुप मे मनाया जा रहा है। इस दौरान जिला पुलिस के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिये गये है की वह अपने-अपने एरिया मे अलग अलग तरीकों से आमजन को नशा ना करने प्रति जागरुक करें। सामाजिक संगठनो, बस स्टैंडों, टैस्सी स्टैंडों पर लोगों को नशे से दूर रहने तथा नशे से होने वाले दुष्परिणामों के बारे मे विस्तार से जानकारी दी जाये। पुलिस अधीक्षक की तरफ से सभी डीएसपी ,थाना प्रभारियो तथा चैकीं प्रभारियो को निर्देश दिये गये है कि 26 जून को विश्व एन्टी ड्रग डे के रूप में मनाया जाएगा। आमजन खासकर युवा पीड़ी को नशे से होने वाले शारीरिक तथा वितीय दुष्प्रभावों के बारे विस्तार से समाझाया जाऐ। श्रीमति मोदी ने कहा कि नशा ही सभी प्रकार के अपराधों की जड़ है। आज का युवा यदि अपने जीवन मे कामयाब होना चाहते हैं, तो नशे से दूर रहना होगा। नशा करने वाला व्यक्ति ही नही बल्कि उसका पुरा परिवार पतन की ओर बढ़ता चला जाता है। नशा एक ऐसी लत है जिसे छोडना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नही। यदि आम नागरिक इस के प्रति जागरूक होगा तो नशे की दलदल से बाहर निकला जा सकता है। देश को केवल कानून के द्वारा नशा मुक्त नहीं किया जा सकता। स्वास्थय विभाग का भी कर्तव्य बनता है कि जीवन रक्षक दवाईयों के रूप में प्रयोग होनें वाली दवाईयों का प्रयोग केवल डॅाक्टर की सलाह अनुसार ही बाजार में बेची जाए। प्रायः देखने में आता है कि कुछ जीवन रक्षक दवाईयों का अत्यधिक प्रयोग नशे के लिए किया जाता है। जिस पर केवल सम्बंधित विभाग ही समय-समय पर दवा विक्रेताओं को चैक करकेे उनके विरूध कानूनी कार्यावाही की जाए, ताकि नशें में संलिप्त लोगों को नशा पूर्ति करने में मुश्किलें आये। आज के युग में अभिभावकों का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ-साथ उनकी दैनिक गतिविधियों पर भी ध्यान रखें। नागरिकों का यह भी नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने आस-पाास नशे के कारोबार मेें लगे लोगों पर नजर रखें। कानून चाहे जितना भी सख्त क्यों ना हो आम जनता के सहयोेग के बिना किसी काम का नही है। नशा देश को लकड़ी के घुन की तरह बर्बाद कर रहा है। नशे के धन्धें में लगे लोगों पर आम नागरिक की सहायता से ही रोक लगाई जा सकती है। ज्यादातर नशा तस्करी करने वालें अबोध बालकों को ही अपना शिकार बनातें है इसके अतिरिक्त इस प्रकार के धन्धें में संलिप्त करने के लिए झुग्गी-झोपड़ी तथा गरीब लोगों को पैसे का लालच देकर इनका प्रयोग करते है। पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का भी कर्तव्य बनता है कि झुग्गी झोपडियों में रहने वालें लोगों पर ज्यादा ध्यान दें तथा समय-समय पर इस प्रकार के लोगों को नशे के दुश्परिणामों के बारे में अवगत करवायें। खासकर युवा बच्चों को नशे से दूर रखने का प्रयास किया जाए।
