धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्कृत आवश्यक : पद्मश्री योगेश्वर दत्त
June 21, 2020
कैथल (रवि गोयल ) वैश्विक कोरोना महामारी निवारण यज्ञ के सातवें दिन मुख्यातिथि के रुप में कुश्ती के क्षेत्र में जाने माने पहलवान एवं प्रख्यात ओलम्पिक विजेता पद्मश्री योगेश्वर दत्त ने कहा कि बचपन में संस्कृत नहीं पढ़ पाया, परन्तू अब मैं भी संस्कृत का अध्ययन करुँगा और सदा संस्कृत के लिए समर्पित रहूँगा। धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्कृत आवश्यक है। हमें हिन्दुस्तान को विश्व शक्ति बनाना है इसके लिए हमेशा एक होकर कार्य करना है। कुलपति डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने वाल्मीकि आश्रम का वर्णन करते हुए कहा कि जैसे महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश को हर प्रकार के संस्कारों से परिपूर्ण किया उसी प्रकार संस्कृत विश्वविद्यालय भी संस्कृत एवं संस्कृति को घर-घर तक पहुँचाने हेतु कटिबद्ध है। मुख्यमन्त्री मनोहर लाल के संस्कृत विश्वविद्यालय निर्माण के संकल्प की पूर्ति में यह यज्ञ प्रथम प्रयास है। इसके माध्यम से शास्त्रों का प्रचार प्रसार करने में अवश्य ही सफल होंगे, जिससे समाज भी पूर्ण रुप से लाभान्वित होगा। इस अवसर पर उन्होंने पद्मश्री योगेश्वर दत्त का आभार जताया और विश्वविद्यालय परिवार की ओर से धन्यवाद किया। इस अवसर पर शहीद जवानों की आत्मिक शान्ति हेतु मौन भी रखा गया। इस मौके पर डॉ. भीम राव अंबेडकर कालेज के प्राचार्य डॉ.ऋषिपाल वेदी, ज्योतिषाचार्य डॉ.नवीनशर्मा, डॉ.रामानन्द मिश्र, डॉ.विनय त्रिपाठी, जयपाल, सुभाष आदि भी उपस्थित रहे।