चन्द्र मोहन ने कहा कि पिछले 16 दिन में पट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। पट्रोल के मूल्य में 8 रुपए 33 पैसे और डीजल के मूल्य में कुल 9 रुपए 46 पैसे की बढ़ोतरी हुई है । गलती से भी पिछले 16 दिन में एक नया पैसा भी नहीं घटाया गया है। इससे बड़ी विडम्बना यह है कि अन्तर्राष्ट्रीय मार्किट में तेल के मूल्यों में भारी गिरावट आई है, इसके बावजूद भी कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए गरीब व्यक्तियों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश का गरीब और मध्यम वर्ग का व्यक्ति पहले ही कोविड रुपी महामारी के कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहा है।इस दौरान करोड़ों लोगों का रोजगार चला गया, सैकड़ों मजदूर केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण मर गए। उसकी तो सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार को चिंता है तो बड़ी कम्पनियों की। देश में लगभग 38 करोड़ मध्यम वर्ग के लोग हैं , इसके अतिरिक्त लगभग 12 करोड़ किसान हैं, जिनको महंगाई की मार को झेलना पड़ेगा। इसकी सरकार को परवाह नहीं है। किसान और गरीब तो केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होता है।
उन्होंने कहा कि डीजल के दाम दाम बढने का सबसे बुरा असर उस किसान पर पड़ेगा, जिस धान का मूल्य केन्द्र सरकार ने एक साल के बाद केवल मात्र 53 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने की घोषणा की है । वह बढ़ोतरी तो ट्रैक्टर के एक बार चलने में ही बराबर हो जायेगी। डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाने से आने वाले समय में महंगाई बेकाबू हो जायेगी। इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ेगा।
चन्द्र मोहन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की है कि देश की गरीब जनता को महंगाई के प्रकोप से बचाने के लिए तेल कम्पनियों पर लगाम लगाने का कार्य करें। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से मांग की है कि पेट्रोल पर जो वैट लगाया गया है । इसकी दरों में भारी कटौती की जाए ताकि किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिल सके।
